दोस्तो....
मेरे अज़ीज़ दोस्त श्री संजय सनन जी अपने एस एम् एस के ज़रिये अक्सर शे'र -ओ -शायरी से मुझे शरशार करते रहते हैं ...
सो आज पेश हैं उन्ही के भेजे हुए चंद अशआर:
१ ) हमने माना उसमे होगी सब्र की ताक़त मुझ से ज्यादा ,
देख लो लेकिन उतरी होगी उस की सूरत मुझ से ज़्यादा ...!!!
२) कोई इशारा , दिलासा, ना कोई वादा मगर..,
जब आयी शाम तेरा इंतज़ार करने लगे..,
हमारी सादा-मिजाजी की दाद दे..,
कि तुझे परखे बगैर तेरा ऐतबार करने लगे...!!!
३) वो मोहब्बत के सौदे भी अजीब करता है..,
बस मुस्कुराता है ..और दिल खरीद लेता है...!!!
----- राकेश वर्मा
Showing posts with label शे'र. Show all posts
Showing posts with label शे'र. Show all posts
शे'र
मच्छर जो काटे आपको तो मत होना हैरान ...
अनजाने में ही सही ....
आप कर रहे हैं ...
रक्त -दान ....!!!!
अनजाने में ही सही ....
आप कर रहे हैं ...
रक्त -दान ....!!!!
शे'र
मैं और मेरी तन्हाई...
अक्सर ये बातें करते हैं .....
तुम होती ... तो ऐसा होता.....
तुम होती ... तो वैसा होता .....
और अगर ......
तुम ना होती .....
तो पैसा होता ....!!!!!
अक्सर ये बातें करते हैं .....
तुम होती ... तो ऐसा होता.....
तुम होती ... तो वैसा होता .....
और अगर ......
तुम ना होती .....
तो पैसा होता ....!!!!!
शे'र
साहेबान ... ये दो शे'र मैंने कहीं पढ़े थे ...लेकिन इन के रचनाकार का नाम मुझे याद नही
आप से विनती है कि अगर आपको पता हो तो मुझे बताएं ...
हुस्न-ओ-ज़र-ओ-सियासत भी तो नशे हैं ,
फिर शराब के नशे में बुराई क्या है ?
वादानोशी से मुझे रोकने वालो,
आदमी फितरतन शराबी है ...!!!
इशरत-ऐ -क़तरा है दरिया में फना हो जाना,
दर्द का हद्द से गुजरना है दवा हो जाना ...!!!!
आपके सहयोग की प्रत्याशा में ,
--- राकेश वर्मा
आप से विनती है कि अगर आपको पता हो तो मुझे बताएं ...
हुस्न-ओ-ज़र-ओ-सियासत भी तो नशे हैं ,
फिर शराब के नशे में बुराई क्या है ?
वादानोशी से मुझे रोकने वालो,
आदमी फितरतन शराबी है ...!!!
इशरत-ऐ -क़तरा है दरिया में फना हो जाना,
दर्द का हद्द से गुजरना है दवा हो जाना ...!!!!
आपके सहयोग की प्रत्याशा में ,
--- राकेश वर्मा
शे'र
ये ज़िन्दगी भी कितने अजीब मोड़ लेती है ,
हर एक मोड़ पर इक नया सवाल देती है,
ढूंढते रहते हैं हम उन सवालों के जवाब ,
जवाब मिल जाए तो सवाल बदल देती है..!!!!
हर एक मोड़ पर इक नया सवाल देती है,
ढूंढते रहते हैं हम उन सवालों के जवाब ,
जवाब मिल जाए तो सवाल बदल देती है..!!!!
शे'र
मोहब्बत , हिज़र , ग़ुरबत , नफरत .... सब मिल चुके हैं मुझे ...
मैं अब तकरीबन मुकम्मल हो चूका हूँ ....!!!!
नवर्द - ऐ - इश्क में क्या हुआ क्या बताएं हम
कभी हमने खुद को ऐसे हारते नही देखा ....!!!!
मैं अब तकरीबन मुकम्मल हो चूका हूँ ....!!!!
नवर्द - ऐ - इश्क में क्या हुआ क्या बताएं हम
कभी हमने खुद को ऐसे हारते नही देखा ....!!!!
शे'र
उस ने ये सोचकर, अलविदा कह दिया हमें .....
ये गरीब लोग हैं , मोहब्बत के सिवा क्या देंगे ...???
वो रोज़ देखती है, डूबते हुए सूरज को...
काश हम भी किसी शाम के मंज़र होते...!!!!
ये गरीब लोग हैं , मोहब्बत के सिवा क्या देंगे ...???
वो रोज़ देखती है, डूबते हुए सूरज को...
काश हम भी किसी शाम के मंज़र होते...!!!!
शे'र
तेरी आँख का इक अश्क ही काफी था मेरे लिए,
मैंने डूबने के लिए सागर- ओ -मीना नहीं चाहा !!!
रानाई इस मौसम -ए - बरसात की तो देखो ,
जम के बरसा है उनसे बिछुड़ जाने के बाद !!!!
मैंने डूबने के लिए सागर- ओ -मीना नहीं चाहा !!!
रानाई इस मौसम -ए - बरसात की तो देखो ,
जम के बरसा है उनसे बिछुड़ जाने के बाद !!!!