मेरा भारत महान
मेरा महान देश भारत विश्व के अग्रणी देशों में से एक है । अनेकता में एकता की मिसाल मेरा देश कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक विभिन्न सन्सकृतिओं को अपने आप में समेटे हुए है । २९ प्रदेशो एवं ४ केंद्र शाशित क्षेत्रों से बना ये देश अखंड भारत के नाम से जाना जाता है । मेरे देश की भोगोलिक स्थिती कुछ ऐसी है कि हिमालय पर्वत मेरे देश के मस्तक के रूप में चमकता है और इस के चरणों में हिंद महासागर है ।
मेरे देश में सब धर्मों के लोग प्यार से रहते हैं । हिन्दू मुसलमान सिख ईसाई अदि सभी धर्मों को मान ने वालों को यहाँ पूर्ण सम्मान मिलता है । यहाँ अतिथी को देवता एवं कन्या को देवी मानक र पूजा जाता है । अंग्रेजो ने हमारे देश पर ३०० साल तक राज किया पर महात्मा गांधी ने अहिंसा से एवं भगत सिंह सरीखे देश भक्तों ने क्रांति मार्ग अपना कर देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करवाया ।
आज हमारा देश हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर है । यहाँ सुई से लेकर हवाई जहाज़ तक का निर्माण होता है । कभी साँपों व् साधुओं के देश के रूप में जाना जाने वाला भारत आज विश्व के चोटी के देशों में शामिल है । मेरे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है । भारत में जन्मे सचिन तेंदुलकर , लता मंगेशकर आज सम्पूरण विश्व के लिए नजीर हैं । यहाँ के इंजीनियर , डाक्टर , सैनिक, व् खिलाड़ी देश की तरक्की में तो योगदान डालते ही हैं , विश्व स्तर पर भी देश का नाम ऊँचा करते हैं । मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि मेरा देश दिन दुगुनी रात चौगुनी तरक्की करे ....!!!!
----- राकेश वर्मा
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आत्मनिर्भरता
आत्मनिर्भरता
{गतांक से आगे }
अब प्रश्न यह है कि हम आत्मनिर्भर कैसे बने ?
तो इसका सीधा एवं सरल उत्तर है कि अपना काम खुद करके । बचपन से ही अगर हम आत्मनिर्भर होने की कोशिश करें तो कामयाबी के सोपान पर चढ़ सकते हैं । हमें बच्चों को समझाना चाहिए कि उन्हें जो भी गृह -कार्य मिले उसे स्वेयम करें ना कि किसी सहपाठी पर आश्रित रहें । घर में रहते हुए छोटे - छोटे कामों के लिए अपने माँ-बाप या बड़े भाई बहनों का मुहं ना देखें अपितु अपना काम स्वेयम करें । उदाहरण के लिए अपनी स्कूल की किताबों को व्यवस्थित ढंग से सहेज कर रखें । समय-सारिणी अनुसार उन्हें बस्ती में डाल कर रखें । सुबह स्कूल जाना है तो रात को अपना सारा सामान जैसे किताबें, वर्दी , जूते- जुराबें आदि यथास्थान रखें ताकि सुबह ना तो हड-बड़ी फैले और ना ही हमें किसी सहायता की आवश्यकता पड़े ।
बच्चों को बड़ों से सहयोग तो मिलता ही है , मार्गदर्शन भी मिलता है। माता पिता की बच्चों से बहुत उम्मीदें होती हैं। वे अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हैं । बच्चों को भी आत्मनिर्भर बनकर अपने कर्तव्य का निर्वाह करना चाहिए । बच्चे माँ-बाप के लिए सहारा बने ना कि बोझ । हम अगर आत्मनिर्भर नही होंगे तो किसी न किसी के लिए बोझ जरूर बनेंगे । अगर दूसरों पर आश्रित रहने की लत एक बार लग गयी तो सारी ज़िन्दगी यूँ ही निकल जाती है।
इन सबके इलावा आत्मनिर्भर न होना हमें कभी कभी उपहास का पात्र भी बना देता है । लोग-बाग़ देख कर हंसते हैं कि हम अपना काम स्वेयम करने में भी असमर्थ हैं । परजीवी व्यवहार वाला व्यक्ति किसी के मन को नही भाता । इसलिए आईये आज से ही आत्मनिर्भर होने की दिशा में कदम बढायें ।
{गतांक से आगे }
अब प्रश्न यह है कि हम आत्मनिर्भर कैसे बने ?
तो इसका सीधा एवं सरल उत्तर है कि अपना काम खुद करके । बचपन से ही अगर हम आत्मनिर्भर होने की कोशिश करें तो कामयाबी के सोपान पर चढ़ सकते हैं । हमें बच्चों को समझाना चाहिए कि उन्हें जो भी गृह -कार्य मिले उसे स्वेयम करें ना कि किसी सहपाठी पर आश्रित रहें । घर में रहते हुए छोटे - छोटे कामों के लिए अपने माँ-बाप या बड़े भाई बहनों का मुहं ना देखें अपितु अपना काम स्वेयम करें । उदाहरण के लिए अपनी स्कूल की किताबों को व्यवस्थित ढंग से सहेज कर रखें । समय-सारिणी अनुसार उन्हें बस्ती में डाल कर रखें । सुबह स्कूल जाना है तो रात को अपना सारा सामान जैसे किताबें, वर्दी , जूते- जुराबें आदि यथास्थान रखें ताकि सुबह ना तो हड-बड़ी फैले और ना ही हमें किसी सहायता की आवश्यकता पड़े ।
बच्चों को बड़ों से सहयोग तो मिलता ही है , मार्गदर्शन भी मिलता है। माता पिता की बच्चों से बहुत उम्मीदें होती हैं। वे अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हैं । बच्चों को भी आत्मनिर्भर बनकर अपने कर्तव्य का निर्वाह करना चाहिए । बच्चे माँ-बाप के लिए सहारा बने ना कि बोझ । हम अगर आत्मनिर्भर नही होंगे तो किसी न किसी के लिए बोझ जरूर बनेंगे । अगर दूसरों पर आश्रित रहने की लत एक बार लग गयी तो सारी ज़िन्दगी यूँ ही निकल जाती है।
इन सबके इलावा आत्मनिर्भर न होना हमें कभी कभी उपहास का पात्र भी बना देता है । लोग-बाग़ देख कर हंसते हैं कि हम अपना काम स्वेयम करने में भी असमर्थ हैं । परजीवी व्यवहार वाला व्यक्ति किसी के मन को नही भाता । इसलिए आईये आज से ही आत्मनिर्भर होने की दिशा में कदम बढायें ।
आत्मनिर्भरता
आत्मनिर्भरता
मानव जीवन के विकास हेतु कई गुणों कि आवश्यकता होती है , आत्मनिर्भर होना इनमे विशेष स्थान रखता है । आत्मनिर्भरता का अर्थ है अपने काम स्वयम करने के काबिल होना । हम जो करें अपने बलबूते पर कर सकें न कि किसी पर आश्रित रहें ।
किसी भी देश जाति एवं धर्म की उन्नति के लिए उसके निवासियों का आत्मनिर्भर होना अति आवश्यक है । समाज की सबसे छोटी इकाई एक मानव है, अगर मानव आत्मनिर्भर होगा तो परिवार आत्मनिर्भर होगा , परिवार आत्मनिर्भर होगा तो समाज आत्मनिर्भर होगा, समाज आत्मनिर्भर होगा तो देश आत्मनिर्भर होगा ॥ यह एक स्थापित तथ्य है कि आत्मनिर्भर देश ही उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता है । ........
[बाकी कल]
मानव जीवन के विकास हेतु कई गुणों कि आवश्यकता होती है , आत्मनिर्भर होना इनमे विशेष स्थान रखता है । आत्मनिर्भरता का अर्थ है अपने काम स्वयम करने के काबिल होना । हम जो करें अपने बलबूते पर कर सकें न कि किसी पर आश्रित रहें ।
किसी भी देश जाति एवं धर्म की उन्नति के लिए उसके निवासियों का आत्मनिर्भर होना अति आवश्यक है । समाज की सबसे छोटी इकाई एक मानव है, अगर मानव आत्मनिर्भर होगा तो परिवार आत्मनिर्भर होगा , परिवार आत्मनिर्भर होगा तो समाज आत्मनिर्भर होगा, समाज आत्मनिर्भर होगा तो देश आत्मनिर्भर होगा ॥ यह एक स्थापित तथ्य है कि आत्मनिर्भर देश ही उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता है । ........
[बाकी कल]