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शे'र

दोस्तो....
मेरे अज़ीज़ दोस्त श्री संजय सनन जी अपने एस एम् एस के ज़रिये अक्सर शे' - -शायरी से मुझे शरशार करते रहते हैं ...
सो आज पेश हैं उन्ही के भेजे हुए चंद अशआर:

) हमने माना उसमे होगी सब्र की ताक़त मुझ से ज्यादा ,
देख लो लेकिन उतरी होगी उस की सूरत मुझ से ज़्यादा ...!!!

) कोई इशारा , दिलासा, ना कोई वादा मगर..,
जब आयी शाम तेरा इंतज़ार करने लगे..,
हमारी सादा-मिजाजी की दाद दे..,
कि तुझे परखे बगैर तेरा ऐतबार करने लगे...!!!

) वो मोहब्बत के सौदे भी अजीब करता है..,
बस मुस्कुराता है ..और दिल खरीद लेता है...!!!

----- राकेश वर्मा

6 comments:

निर्मला कपिला said...

कोई इशारा , दिलासा, ना कोई वादा मगर..,
जब आयी शाम तेरा इंतज़ार करने लगे..,
हमारी सादा-मिजाजी की दाद दे..,
कि तुझे परखे बगैर तेरा ऐतबार करने लगे...!!!
वाह संजय जी बहुत अच्छे शेर कहते हैं वर्मा जी उनका भा ब्लाग बनवा दीजिये । धन्यवाद आपका।

माधव said...

wah wah wah

दिगम्बर नासवा said...

वो मोहब्बत के सौदे भी अजीब करता है..,
बस मुस्कुराता है ..और दिल खरीद लेता है...!!!

खरीदते कहा जनाब ... वो तो छीन लेते हैं ..

sanan said...

Hume apne blog me jagah dene ke liye aapka.......Bahut-bahut shukria Verma ji !!!

Anonymous said...

wah
wah wah

Anonymous said...

wah wah wah kya likhte ho aap