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मैं और मेरी तन्हाई...

अक्सर ये बातें करते हैं .....

तुम होती ... तो ऐसा होता.....


तुम होती ... तो वैसा होता .....


और अगर ......

तुम ना होती .....

तो पैसा होता ....!!!!!

9 comments:

पलक said...

कुडि़यों से चिकने आपके गाल लाल हैं सर और भोली आपकी मूरत है http://pulkitpalak.blogspot.com/2010/06/blog-post.html जूनियर ब्‍लोगर ऐसोसिएशन को बनने से पहले ही सेलीब्रेट करने की खुशी में नीशू तिवारी सर के दाहिने हाथ मिथिलेश दुबे सर को समर्पित कविता का आनंद लीजिए।

Udan Tashtari said...

हा हा!! बेचारा!

आचार्य जी said...

क्रोध पर नियंत्रण स्वभाविक व्यवहार से ही संभव है जो साधना से कम नहीं है।

आइये क्रोध को शांत करने का उपाय अपनायें !

हास्यफुहार said...

वाह-वाह!

राजेन्द्र मीणा said...

मजेदार पोस्ट !!

Shekhar Kumawat said...

gajab ka post

2 line pad kar laga dam nahi hoga magar last line jese hi padi

bas na poocho kya huwa


maje dar

shandar

or bahut khub


shekhar kumawat

दिलीप said...

ha ha badhiya

शरद कोकास said...

ये क्या लिख दिया भाई ?

AKHRAN DA VANZARA said...

अपना अनुभव है शरद जी ...