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शे'र

तेरी आँख का इक अश्क ही काफी था मेरे लिए,
मैंने डूबने के लिए सागर- ओ -मीना नहीं चाहा !!!


रानाई इस मौसम -ए - बरसात की तो देखो ,
जम के बरसा है उनसे बिछुड़ जाने के बाद !!!!

3 comments:

अजय कुमार said...

बहुत खूब

परमजीत बाली said...

बहुत बढ़िया!!

निर्मला कपिला said...

लाजवाब शुभकामनायें